अरुणेंद्र नाथ वर्मा

अंतिम सच

सुबह की सैर से लौट कर नहाना धेना, नाश्ता करना और पिफर आराम से बालकनी में आराम कुर्सी पर पैर पसारकर अखबार पढ़ना। बड़े चैन की जिंदगी बीत रही थी मेहरा साहेब की। पत्नी भी थोड़ी देर में आकर साथ पड़ी कुर्सी पर बैठ जायेंगी। उनकी दिनचर्या कहीं अध्कि व्यस्त थी। पोते-पोती को स्कूल भेजने में बहू की मदद करने, बेटे बहू को आॅपिफस भेजने और खाना बनाने वाली श्यामा को निपटाने के बाद जब तक वह बा....

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