ज़हीर कुरेशी

एक बच्चे का किनकता मन अधूरा है,

 

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एक बच्चे का किनकता मन अधूरा है,

मां के आंचल के बिना बचपन अधूरा है।

 

जो दि सकता नहीं छवि आपकी पूरी,

मैं समझता हूं कि वो दर्पन अधूरा है।

 

इक जरा-सी बात पर उठने लगी दीवार,

हो गया दो फांक हो आंगन, अधूरा है।

 

पेट की हो....

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