सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

चूल्हा और आदमी

चूल्हा और आदमी

आदमी को 

चूल्हे की तरह 

होना चाहिए

 

बिना आग

चूल्हा और आदमी

दोनों ही किसी के नहीं।

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हत्यारा

हत्यारा 

केवल वही नहीं

जो हथियार उठाता है

गोली चलाता है

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