सुधीश पचौरी

हिंदी साहित्य के सत्तर बरस

एक बार फिर हम पिछली सदी के आखिरी दशक यानी उन्नीस सौ नब्भे के आसपास और उसके बाद में हुई कुछ नई शुरूआतों  को याद करेंः

-सोवियत संघ के समाजवाद का पतन!शीतयुद्ध का खात्मा!दो ध्रुवीय दुनिया का अंत और अमरीका केंद्रित एक ध्रुवीय दुनिया का रह जाना!

-ग्लोबलाइजेशन की शुरूआत!एमएनसीज का बढता वर्चस्व!आइएमएफ वर्ल्ड बैंक का वर्चस्व!विश्व बाजार का वर्चस्व!डा....

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