गंगा प्रसाद विमल

दुनिया की आखिरी गप्प उर्फ गल्पांत

परदा हटाया तो बाहर के मनोहारी दृश्य दीखने लगे। दूर क्षितिज तक फैले पहाड़ों की ढलानें। पंक्तियों में खड़े पेड़। और आसमानी खुलेपन में छोटे-छोटे बादलों के गुच्छे। बहुत धीमे-धीमे वे गुच्छे उत्तर की ओर बढ़ रहे थे। उत्तरी दिशाओं में हिमालय पसरा हुआ था। वहीं उन ऊँची चोटियों के पीछे थोड़े घने कालेपन के साथ बादलों की तहें थीं। दूर-दूर तक फैली हुई हरियाली पूरे दृश्य को अविस....

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