जयशंकर

विस्थापित

मई की इन भीषण गर्मियों में भी अरुणा अपने मकान कीखिड़की से नजर आते, बूढ़े पीपल के पेड़ की हरियाली को महसूस कर रही है। चौराहे पर सड़क के किनारे खड़ा हुआ पुराना पेड़। करीब में चाय की गुमठी और उसे सटी हुआ पान-सिगरेट की छोटी-सी दुकान। इन नौ-दस बरसों में यहां का परिवेश कितना ज्यादा बदल गया। पहले यहां बस्ती हुआ करती थी। सब्जियों और फलों की दुकानें खड़ी रहती और इन सबके साथ बनी रह....

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