भारत भारद्वाज

कलम के जादूगर: श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी

बात बचपन की है। साल पचपन की। तब मैं अपने गांव (चांदपुरा, जिला मुजफ्रफरपुर, अब वैशाली, बिहार) के सुंदर माध्यमिक विद्यालय में सातवें वर्ग का विद्यार्थी था। हिंदी की पाठ्य पुस्तक में वैसे तो कई कहानियां थी। लेकिन अब मुझे सिर्फ तीन कहानियां याद रह गई हैं। प्रेमचंद की ‘अमावस्या की रात्रि’, सुदर्शन की ‘हार की जीत’ और बेनीपुरी की ‘कहीं धूप, कहीं छाया।’ परीक्षा की तैय....

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