दिनेश पाठक

एक नदी थी यहां

छह साल की उम्र में गांव छूट गया था। यादों में बहुत हल्का-सा कुछ है कुहासे की तरह खिंचा हुआ, जो स्मरण रह गया है। जैसे यही कि आस-पास के कई गांवों के बीच सिपर्फ एक अकेला प्राथमिक विद्यालय हुआ करता था, जहां सुबह-सुबह कंघे में पाटी लटकाए, हाथ में कमेट की दवात व निगाल की कलम लिए विद्यालय की ओर भागमभग होती थी। गांव के तब वे छह बच्चे थे, लगभग हमउम्र, एक ही कथा में बैठे हिंदी व....

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