कृष्ण बिहारी

  अड्डेबाजी फिर जी उठी 

अबूधाबी में अड्डेबाजी की बात करूँ उससे पहले बताना ज़रूरी है कि हिंदुस्तान में अड्डेबाजी से कैसे जुड़ता चला गया ... 
कुछ बातें धीरे-धीरे मनुष्य के खून में घुल जाती हैं। अड्डेबाजी में भी कुछ ऐसा ही है जो एक नशा बनकर व्यक्तित्व का हिस्सा हो जाती है । मैं अपनी किशोरावस्था में जितना आत्मकेन्द्रित और अंतर्मुखी था युवावस्था तक आते-आते उतना ही मुखर होता गया। जो एकांत मुझे बहुत ....

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