भरत प्रसाद

आधा डूबा आधा उठा हुआ विश्वविद्यालय

‘चुनाव’ शब्द तानाशाही और अन्याय की दुर्गंध देता है। जबकि मजा यह कि इंसानों से पटी पड़ी दुनिया में खोजना मुश्किल हो जाएगा कि कौन चुनाववादी नहीं है। कामयाबी के सिंहासन पर विराजने के लिए गुणा-गणित, जोड़-घटाना की कलाकारी का चुनाव। सफलता के शिखर पर चढ़कर डिस्कोडांस करने के लिए अपने-पराए, खास, बेखास, बदनाम, सरनाम, गुमनाम का सीढ़ी के तौर पर इस्तेमाल। इसी चुनाचुनी में अपने न जाने क....

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