राजकुमार भाटी

दंगों के असली गुनहगार न्यूज स्टूडियों में बैठे हैं

विगत 23, 24, 25,  व 26 फरवरी को दिल्ली हिंदू-मुस्लिम दंगो की गवाह बनी। देश की राजधानी में साम्प्रदायिक दंगों का होना चिन्ता की बात है। चार दिन तक संड़कों पर वहशीपन का खेल चलता रहा। 53 लोगों की मौत और हजारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ। इक्कीसवीं सदी के भारत में नागरिकों का यूं पशुओं की तरह लड़ना हमारे मानसिक पिछड़ेपन की ही निशानी है। इस विवाद में पड़ना बेकार है कि ज्यादा गलती हिं....

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