शिव कुशवाहा

नयी भाषिक चेतना और गहन आत्म-निरीक्षण की कविताएँ : 'छाया का समुद्र'

कविता सदैव अपने समकाल को रेखांकित करते हुए आगे बढ़ रही है। समकालीनता का प्रश्न वर्तमान में घटित हो रहे अपने समय से है। कवि अपनी संवेदना और आत्मचिंतन से  कविता से जुड़ता है और अपने समकाल को रचता है। वह जिस परिवेश में रहता है उसी को अपनी लेखनी से जीवंत बनाता है। आज की समकालीन चेतना से लैस कवि महेश आलोक एक लंबे अरसे से अपनी धारदार कविताओं के यथार्थ से जाने जाते रहे हैं। उनका प....

Subscribe Now

पूछताछ करें