चिट्ठी आई है

हिन्दी भाषा और किताबों के डूबने की दास्तान

‘पाखी’ मार्च अंक में दयानंद पांडेय जी ने घट तोली की अनंत कथा के बहाने ग्लेशियर के पानी के बाहर के हिस्से को दिखा कर बहुत अच्छा किया है। संसद से सड़क तक नैतिकता की मुनादी करते, उपदेश देते हिन्दी के अधिकांश लेख़क इस लेख़ में अपनी सूरत और सीरत देख़ सकते हैं। आखिर हिन्दी क्यों डूबी इसकी वाकई अनंत कथाएं हैं? स्कूलों में हिन्दी नहीं पढ़ाई जाए तो संविधान का उल्लंघन नहीं होत....

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