प्रेम भारद्वाज 

आलोचकों का अकेलापन

राजधानी दिल्ली के बड़े सभागार में संगोष्ठी। नामवर सिंह का अध्यक्षीय भाषण। पांच सौ के लगभग बैठे श्रोतागण मंत्रमुग्ध। तालियों की गड़गड़ाहट। वे अपनी पूरी रौ में हैं। संगोष्ठी के उपरांत भीड़ में घिरे नामवर सिंह को बधाइयां मिल रही हैं। वे केवल मंद-मंद सहज भाव से मुस्कुराते हैं। भीड़ उन्हें छोड़ना नहीं चाहती।
अगली सुबह। इसी राजधानी दिल्ली के शिवालिक अपार्टमेंट का 32 नं- ....

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