प्रेम भारद्वाज 

सफ़ेद हो रही इस रात में---

 

(पागलखाने से लिखा गया पत्र)

 

व्यक्ति सत्ता की अमानवीय कार्यवाहियों का अप्रकट शिकार होता है। 
और वह इस बात को जान नहीं पाता। इसलिए एक उदार 
जनतंत्र की संरचना जरूरी है।
-मिशेल फूको


मैं पागलखाने में हूं और मेरा नाम टोबाटेक सिंह नहीं है। मुझे दुनिया के बेमिशाल अफसानानिगार सदाअत हसन मंटो म....

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