प्रेम भारद्वाज 

माफ करें, आपका वक्त खराब किया 

वैधानिक चेतावनी : भावुकता विकास के लिए हानिकारक और मौजूदा दौर में असभ्यता है। गुजारिश है कि इसे वे नहीं पढ़े जो उदासी, दर्द, स्मृति, परंपरा को पिछड़ेपन का प्रतीक मानते हैं।

सिर पर छत नहीं रही, जख्मों से मरहम महरूम हुआ... हड्डियों में धंसे दर्द की खाल नुच गई, लंबे तपते रेगिस्तान का एकमात्र दरख्त सूख गया... कलेजे को केकड़े ने दबोचा... सांसें अब रेहन पर हैं... जिस्म बेज....

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