कृष्ण बिहारी

मैं आज भी उस पौधे को देखता हूँ... 

प्रेम भारद्वाज से मेरी पहली मुलाक़ात हंस के वार्षिक कार्यक्रम में हुई। मात्र परिचयात्मक। पहली दृष्टि में कोई जो कुछ देख पाता है वही मैंने भी देखा। पैंतालीस के लगभग उम्र। भारतीय सांवला रंग। स्वस्थ शरीर । औसत कद । चेहरे पर बिहारी मुस्कान जिसमें कुछ-कुछ शर्मीलापन दिखा । उन दिनों मैं पाखी में लिखता नहीं था । प्रेम भारद्वाज पाखी के संपादक हैं , यही उनके विषय में मेरी जानकारी ....

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