भारत यायावर

‘तुम जी रहे हो कि थेथरई कर रहे हो’

प्रेम भारद्वाज का अचानक जाना मेरे लिए एक हादसे की तरह है। प्रेम भारद्वाज मुझे अपने गुरु की तरह आदर और मान देते थे। वे कभी भी मुसीबत में घिरते थे तो मुझे फोन पर बात करके समस्या का समाधान करने को कहते थे। मेरी बातों को वे बेहद ध्यान से सुनते थे। और मेरे सुझावों पर अमल करते थे। 2010 में मैं लंबे समय के बाद दिल्ली गया तो अपने परम मित्र भारत भारद्वाज के घर ठहरा हुआ था। ‘आकाश दर्शन ....

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