दिविक रमेश

प्रेम भारद्वाज: अप्रत्याशित व्यक्तित्व का धनी

“क्या इतनी जल्दी जाना चाहिए था आपको प्रेम भारद्वाज? जनता हूं कि जवाब आसानी से नहीं दोगे। या रहस्यमयी मुस्कान भरके चुप हो जाओगे। मुस्कुराते-मुस्कुराते हुए भी कुछ सोचेते से नजर आओगे।  या फिर खोते से चले जाओगे। जवाब देने में तो मुझे आफी हद तक कंजूस ही आते रहे हो। लेकिन लगे हमेशा निरभिमानी हो, भलनसाहत का प्रदर्शन न करने वाले।भले होकर भी। दृढ़  लेकिन विनम्र। अचानक पहुंच ग....

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