अर्पण कुमार

प्रेम भारद्वाज : एक स्थापित संपादक और एक बनता हुआ वक्ता

1. इस दुनियावी हमाम में कमोबेश हम सभी निर्वसन हैं। ऐसे में जिनके देहात्म पर सामाजिकता, उदारता, समामेलन, संकोच और मूल्य के कुछ ज़्यादा वस्त्र दिखते/ पाए जाते हैं, हमें वे अपेक्षाकृत अधिक बेहतर इंसान नज़र आते हैं और हम उन्हें औरों से कुछ अधिक अंक देना चाहते हैं। चाहे इसमें हमारी इच्छा हो या अनिच्छा।... इस कसौटी पर प्रेम भारद्वाज का नाम निश्चय ही आदर से लिया जाना चाहिए।
हम जीते....

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