साध्ना अग्रवाल

तुम्हें यूं ही नहीं भुलाया जा सकता प्रेम भारद्वाज!

अब यह तो मुझे ठीक से याद नहीं कि प्रेम भारद्वाज से मेरी पहली मुलाकात कब हुई, बस इतना भर याद है कि अपने बेगारी के दिनों में मैं किसी नौकरी की तलाश में थी, और एक दिन संभवतः 2008 में संडे पोस्ट (साप्ताहिक अखबार) के नोएडा स्थित कार्यालय में संपादक अपूर्व जोशी जी मिलने गई। चूंकि संडे पोस्ट में मेरी समीक्षाएं, परिचर्चा आदि छपती रही थीं। वहां तीन-चार घंटे काम को समझने और कुछ लोगों से -ज....

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