खेमकरण ‘सोमन’

हम हैं या हम नहीं हैं

प्रेम जी के सम्पादकीय बहुत बेजोड़ हैं। उनमें कई प्रकार के विचारतत्वों का समावेश है जिन पर उत्तर आधुनिक समाज कभी चिंतन न करे। उत्तरआधुनिक समाज समस्याएँ तो गिना देता है लेकिन उस पर बात नहीं करता। वह हमेशा शीघ्रता में होता है! इसके विपरीत आधुनिक समाज वह है जो समस्या भी गिनवाता और उसपर बात भी करता है। प्रेम जी आधुनिक समाज और हिंदी साहित्य के अभिन्न अंग हैं, जिन्होंने एक दशक में कहानीका....

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