शम्भु पी सिंह

मैं क्षणों में जीता हूं, शताब्दियों में मरता हूं.

 बात 2016 की है।प्रेम भारद्वाज पटना पधारे थे। नाट्य कर्मी अनीश अंकुर का फोन आया- 'प्रेम भाई पधारे हैं, अगर आपके पास कुछ समय(टेलीविजन के लिए बात करने हेतु) हो, तो उन्हें लेकर आ जाएं, वो आपसे मिलना भी चाहते हैं। 'अनीश जी की सूचना हमारे काम की थी। मैंने तत्क्षण हामी भरी। दूरदर्शन बिहार के लिए रिकॉर्डिंग की तिथि और समय निर्धारित कर कार्यालय आने को कहा। प्रेम जी से मुलाकात तो पह....

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