दाताराम चमोली

अंतिम समय तक साहित्य साधना करते रहे

विश्व प्रसिद्ध कवि जाॅन कीट्स चाहते थे कि वे एक सर्जन नहीं, बल्कि साहित्यकार के तौर पर जाने जाएं। प्रेम भारद्वाज के भीतर भी मैंने यही छटपटाहट देखी। पत्रकार से ज्यादा वे साहित्यकार की पहचान पसंद करते थे। ‘दि संडे पोस्ट’ में उनके साथ करीब एक दशक तक काम करने का अवसर मिला। उनमें एक अच्छे पत्रकार के सभी गुण थे। खेल, सिनेमा, साहित्य, राजनीति आदि तमाम विषयों पर उनका गहन अध्य....

Subscribe Now

पूछताछ करें