चिट्ठी आई है

‘पाखी’ को इस कोशिश के लिए सलाम 

आज भक्त चैनलों और सत्ता के सामने दंडवत करते दैनिकों तथा पत्र-पत्रिकाओं की भीड़ में ‘पाखी’ और ‘रविवार डॉयजेस्ट’ जैसी पत्रिकाएं निकालना अपने को हर पल सत्ता के कोपभाजन होने के खतरे में डालना है- कलकत्ते के एक बड़े शायर परवेज शाहिदी का एक शेर है ‘कुछ समझ कर ही हुआ हूं, मौज-ए-दरिया का हरीफ। वरना मैं भी जानता हूं- आफियत साहिल में है, सरकारी सुविधाओं के लाभ से स्वयं को वंच....

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