प्रदीप जिलवाने

अतीत से बाहर

‘महज साथ सोने से प्यार नहीं हो जाता कार्तिक!’ वह जिस निरपेक्ष तटस्थता से बोली उसने मुझे थोड़ा डरा दिया। मैं उसकी बर्फ जैसी ठण्डी और विद्रोह से थकी आँखों में क्षण भर के लिए तो देखता ही रह गया। 
-‘हम सिर्फ सोते तो नहीं!’ मैंने उसे थोड़ा और कुरेदना चाहा। 
-‘तो सेक्स कर लेने से भी प्यार नहीं होता!’
-‘तो फिर कैसे होता है ?’
-‘जैसे भी होता हो।’ 
-‘तुम त....

Subscribe Now

पूछताछ करें