राकेश मिश्र

संग-असंग

एक एक भर के हर दिया खामोश हो गया बिजली के बल्ब जल गये शहनाईयों के साथ मंटू भाई ने जब भरी महफिल में यह शेर सुनाया तो माहौल अचानक संजीदा हो गया। महफिल मंटू भाई के सम्मान में ही जुटी थी। ऐसा उस महफिल में जमे हुए लोगों में कम से कम पच्चीस प्रतिशत तो मानते ही थे। बाकी पिचहत्तर प्रतिशत के लिये तो मंटू भाई लगभग ‘गये हुए केस’ थे। दरअसल उस माहौल में मंटू भाई धीरे-धीरे उस स्थिति ....

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