पूनम सिंह

एक डायरी के कुछ बेतरतीब पन्ने

 यह कहानी नहीं, सुप्रिया की डायरी के कुछ बेतरतीब पन्ने हैं - यहाँ वहाँ बिखरे हुए - इन्हें बटोर कर  सहेज कर अगर कोई पढ़ने की जहमत उठाये तो शायद कहानी बन जाये ---- बहरहाल ,कुछ बिखरे पन्नों की जुबानी सुप्रिया की कहानी -----

यह जो आड़ी तिरछी रेखायें कोरे कागज पर खींचती रहती हूँ मैं - क्या कोई पगडंडी, कोई राह निकलती है यहाँ से ?  कितनी बड़ी और ऊँची है यह हवेली - इसका कौन सा ....

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