राकेश दूबे

झूलनी का रंग साँचा 

‘गोरिया चाँद के अजोरिया नियर गोर बाड़ू हो 
तुहार जोड़ केहु नईखे तू बेजोड़ बाड़ू हो
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पंडित गुनगुनाते हुये चले जा रहे हैं मेले की ओर|दसहरे के इस मेले का इंतजार पूरे गाँव को खासकर महिलाओं और बच्चों को पूरे साल रहता है| बच्चों के लिए मेले की नौटंकी ,जादू का खेल ,रामलीला और दीवाली के लिए बंदूकें और पटाखा का आकर्षण होता है तो महिलाओं के लिए यह मेला साल भर की व्यक्तिगत ख़र....

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