कविता

 एक पते की चिट्ठियाँ


चिट्ठी -1
डियर नील,        
इस तरह तुम्हें संबोधित करना कुछ अजीब-सा लग रहा है मुझे। इसलिए नहीं कि किसी को कभी इस तरह संबोधित नहीं किया। बल्कि इसलिए कि ऐसा करना न मुझे सूट करता है न मेरी पर्सनैलिटी को। मैं याद भी करूं तो याद नहीं आता पिछली चिठ्ठी मैंने किसको लिखी थी और कब? मम्मा-पापा को भी मैंने कभी कोई चिठ्ठी नहीं लिखी। दोस्तों को भी कभी लिखी हो याद नहीं। अब त....

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