विजय बहादुर सिंह

हमारे मिथकों ‘पुराणों’ में प्रेम

लोक जीवन में प्रेम चाहे जितना भी वर्जित कर्म माना जाय तब भी वह कभी न रुका और न दबाया ही जा सका। मनुष्यों से पहले तो यह देवी-देवताओं के जीवन में फूटा और विकसित हुआ। सोचने में प्रायः यह आ ही जाता है कि वैदिक देवता इन्द्र जितना सबल और पराक्रमी है, उतना ही ऐश्वर्य भोगी और अप्सरा प्रिय भी। उसका दरबार तो अप्सराओं का खजाना जैसा जान पड़ता है। सोचें तो आज तक के सांस्कृतिक इतिहास में ज....

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