राजीव श्रीवास्तव

ये काम कमान भवें तेरी 

सिने गीतों में प्रेम प्रसंग की अनवरत यात्रा वृतान्त 

हिन्दुस्तानी सिनेमा ने जब ‘आलम आरा’(१९३१) के माध्यम से पहली बार बतियाना और गाना प्रारम्भ किया था तब इसके चमत्कारिक प्रभाव से जन मानस हतप्रभ तो था ही साथ ही इसकी बहुआयामी छटा से उत्सर्जित होने वाले गहन और व्यापक सम्भावनाओं के व्योम पर उभरने वाली आकृतियों के दृश्य-परिदृश्य की संकल्पना मात्र से....

Subscribe Now

पूछताछ करें