बजरंग बिहारी तिवारी

दलित स्त्री कविता में प्रेम

प्रेम कविता पर बात करना रचनाकार के अंतरतम की टोह लेना है| यह रचना और सर्जक के बीच का मामला है| निजी मामला| निजता का अहसास ही प्रेम की जमीन तैयार करता है| निजता अर्जित करनी पड़ती है| आर्थिक आधार, शैक्षिक स्तर और सामाजिक दायरेनिजता का निर्माण करते हैं| ऐसे में निजता का ‘निजत्व’ समझने के लिए पूरे समाजार्थिक परिवेश से अवगत होना पड़ता है| जिसके पास अपनी हवेली है, अपना कमरा है, अपन....

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