राकेश बिहारी

जो डूबा सो पार... 

भारतीय और विश्व साहित्य व दर्शन में प्रेम को परिभाषित करने की जाने कितनी कोशिशें हुई हैं। दिलचस्प है कि प्रेम की वे सभी परिभाषाएँ कई बार एक दूसरे से अलग होते हुये भी सच मालूम पड़ती हैं। एक दूसरे से अलग होते हुये भी सच प्रतीत होने के कारण हम इन्हें अपूर्ण भी कह सकते हैं। लेकिन इस टिप्पणी का उद्देश्य प्रेम की इन अलग, अपूर्ण और सच्ची परिभाषाओं का अध्ययन करना नहीं है। बल्कि वि....

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