नीरज खरे

प्रेम के विस्तार में कहानी का वर्तमान

    
‘प्रेम’ का ‘कहानी’ से रिश्ता उतना ही पुराना है, जितनी पुरानी स्वयं कहानी की उत्पत्ति। मिथक से लेकर लोक तक कथाओं में ‘प्रेम’ की उपस्थिति कहानी के साथ उसकी प्रगाढ़ता सिद्ध करती है। सीधे हिंदी कहानी पर ही नज़र रखें तो प्रेम कहानियाँ हर दौर में लिखी गईं। इनमें प्रेम के रूप, मूल्य, अवधारणाएं, व्याख्याएं, विमर्श, सोच-विचार आदि बदलते रहे हैं। कहानी में प्रेम क....

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