प्रेमशंकर शुक्ल

बोल-बनाव

चुप्पी प्रेम की सबसे प्रिय 

शरणस्थली है। बोल-बनाव

मनुहार का सिलसिला।

एक की हथेली 

जब दूसरे की हथेली से 

छूटती है तो फिर लौटना 

छूटते समय की आंच पर 

निर्भर करता है।

 

अधूरे प्रेम का भी 

किस्सा पूरा होता है। कई किस्से मिलकर भी Subscribe Now

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