राजेश्वर वशिष्ठ

आईना

कोरोना काल की इस भयावह चुप्पी को हम सब ने स्वीकार कर लिया है। सोसाइटी के भीतर की सड़कें खाली पड़ी हैं। खुली पार्किंग में लगी कारों पर धूल की मोटी परतें जमी हैं और उन पर चित्रकारी करने वाले बच्चों की उँगलियाँ गायब हैं। छोटे बच्चों के पार्क में लगे लाल हरे झूलों पर चिड़िएँ भी झूलने से परहेज कर रही हैं। हर तरह की चहल-पहल, गतिविधियाँ म्यूटमॉड पर चली गई हैं।टॉवर के गेट पर तैनात सिक....

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