शीलकांत पाठक

भारत गुमशुदा है

भारत कहाँ है 
खेत में 
कि खलिहान में 
कि ताजे फलों के सड़ रहे गोदाम में 
कि एक-में-एक फ्री की दुकान में
भारत कहाँ है 
किसान में 
कि लंगर के परसादी से जीवन चला रहे इंसान में 
कि धडाधड कारें खरीद रहे डेप्रिसियेटेड ईमान में
भारत कहाँ है 
मजदूर में 
कि मजबूर में 
कि सत्ता के धन से लाल हुये किसी मगरूर में
भारत कहाँ है 
धर्म में ....

Subscribe Now

पूछताछ करें