नरेश कौशिक

मौसमों की खुशबू

‘गली के उस पार सामने वाले मकान में नए पड़ोसी आ गए हैं।’ रसोईघर में खड़ी मां की निगाहें गली के सामने वाले मकान पर थीं और हाथ सब्जी काटने में लगे थे। सागर रसोईघर के बाहर ही अपनी स्टडी टेबल पर बैठा पढ़ाई करने में व्यस्त था। रसोईघर के बाहर वाली गैलरी को कवर करके उसे स्टडी रूम बना दिया गया था। स्टडी रूम की गली की ओर खुलने वाली खिड़की से उसने गली के पार वाले मकान को उड़ती सी नजर ....

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