हबीब-उर-रहमान

चोर की मां

जब तेइसवां रोजा बीत गया तब उसे लगा कि अब देर हो रही है। हालाँकि वह नहीं चाहता था कि इस बार ईद पर घर जाए। घर जाओ तो पचास तरह के झंझट, खासकर ट्रेन का टिकट लेना सबसे बड़ी मुसीबत का काम है। पहले लंबी लाइन में लगो और उसके कुछ ही सेकंड में रिज़र्वेशन फुल हो जाता है। अगर रिज़र्वेशन मिल भी गया तो ट्रेन में लोगों की भीड़ देख हलात पतली हो जाती है। रस इतना कि पूछो मत, पैर धरने की भी जगह नहीं मिल....

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