केशव शरण

किताबें और मैं

मैं किताबें ख़रीदता हूं

उन्हें सजाता हूं

छूता हूं

उनके पन्ने उलटता-पुलटता हूं

देखता हूं

दिखाता हूं

पर उन्हें पढ़ नहीं पाता हूं

पूरा

 

मेरा दिमाग़ बिखर जाता है

पढ़ते-पढ़ते

हालांकि, मैं जानता हूं

कालजयी लेख....

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