मालिनी गौतम

हे प्रभो ! हे दीनानाथ !

अलस्सुबह छह बजे
अजान की तेज़ आवाज़ 
गाँव के एक कोने पर बनी 
मस्जिद से निकल कर 
फैल गयी दूसरे कोने तक ।
"मुल्ला बोला" कहते-कहते राकेश 
दूध के चार-पाँच डोलचे 
हाथों में लटकाये 
जल्दी-जल्दी निकलता है घर से ।
किसी रसोईघर में 
चाय के खौलते पानी को 
इंतज़ार है दूध का, 
स्कूल जाने को तैयार बैठा 
एक छोटा-सा बच्चा 
बोर्नविटा वाला ....

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