निर्देश निधि

“परिकथा नहीं थी राजनीति”

फनीश्वर नाथ रेणु एक ऐसे लेखक थे जिसे तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक समस्याएं कभी विस्मृत होती ही नहीं थीं । अन्याय के प्रबल विरोधी थे वे, उनके लिए कह सकते हैं कि वे पहले राजनीति कार्यकर्ता थे फिर लेखक बने। किसी लेखक की मूल भावना जो रही हो उसका लेखन भी उस भावना से प्रभावित अवश्य ही रहता है। उनकी सूक्ष्म दृष्टि आस – पास, दूर – दराज घटने वाली घटनाओं को ध्यान में रख लेतीथी और ....

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