सुरेश कुमार मिश्रा

चला तो चांद तक, नहीं तो शाम तक

फुटपाथ किनारे मारुति ओमिनी कार में एलईडी बल्बों का ठेला लगाए एक दुकानदार लगातार एक ही धुन बजाए जा रहा था- ‘घर को चमकाना है, खुद को रोशन करना है, तो आइए भाई साहब, कदरदान! मेहरबान! दुनिया का सबसे अच्छा एलईडी बल्ब। तीन एलईडी बल्ब सिर्फ सौ रुपए में। सौ रुपये में। सौ रुपये में।’ मैं जब भी बाजार से गुजरता तो यह धुन जरूर सुनता। किंतु आज मैं उसके पास ही चला गया। घर में बल्ब जो खरा....

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