मुकुल रंजन झा

हिन्दी साहित्यमें यात्रा वृतांत की विधा वास्तव में पुरुष वादी विधा है 

चार वर्षों में सौ से अधिक यात्रा-वृत्तान्त पुस्तकों का अध्ययन करने के बाद मैं यह कहने की स्थिति में खुद को पाता हूं कि हिन्दी गद्य साहित्य की इस विधा होने का विकास दूसरी विधाओं जैसे कहानी , उपन्यास, आदि की अपेक्षा नहीं हो सका है और बहुत ही दयनीय स्थिति में है | नई गद्य विधा होने के कारण यात्रा-वृत्तान्तके लिए समकालीन अन्य नई गद्य विधाओं से काफी कुछ लिया गया है | जिन विधाओं की....

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