विनोद अग्निहोत्री

सुशांत से प्रशांत तक भारतीय लोकतंत्र

वैसे तो दुनिया के हर लोकतंत्र को अक्सर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर खरा उतरना होता है और किसी भी संकटकालीन परीक्षा की घड़ी में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और समाजों का व्यवहार भविष्य की नजीर बनता है। लेकिन भारतीय लोकतंत्र को पिछले छह सालों में लगातार एक के बाद एक कई मौकों पर अग्निपरीक्षा देनी पड़ रही है।ताजा मामला है फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की सं....

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