कृष्ण बिहारी

 सद्दाम हुसैन ने दुनिया विभाजित कर दी 

होता है सुख़न से नाम कयामत तलक ऐ ज़ौक
औलाद से तो बस यही दो पुश्त , चार पुश्त ।


आदमी का नाम उसके काम से चलता है । औलाद से एक-दो पुश्त चल जाये तो बड़ी बात है । सद्दाम हुसैन के साथ तो एक-दो पुश्त वाली बात भी नहीं हुई । कहा जाये तो आधी पुश्त यानी कि अपनी ज़िंदगी में सद्दाम हुसैन बने भी और मिटे भी। 
आठवें दशक का वह दौर भी क्या दौर था ! एक तरफ अमरीका दुनिया में दा....

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