डाॅ. कुमार विश्वास

लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना

पिछले पंद्रह-बीस वर्षों में जिन लोगों को राहत भाई का सबसे ज़्यादा साथ मिला, मेरा सौभाग्य है कि मैं उनमें से एक रहा। मैं उन्हें राहत भाई कहता था और वो मुझे “डॉक्टर” ! सत्ताओं की कृपाछायाओं के बाहर सच के हरसिंगार के नीचे चेतना का बोरिया बिछाए युग के कबीरों और नागार्जुनों की परम्परा स्वायत्तता की जो हनक और जीवनशैली की जो बेख़ौफ़ फ़कीरी मांगती है, वह राहत भाई में कूट-कूट कर भरी ....

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