वाचस्पति

घर-निकासी से घर वापसी तक

कथाकार स्वयं प्रकाश (1947-2019 ई-) के जीवनकाल में छपी उनकी अंतिम पुस्तक है ‘धूप में नंगे पांव’ आवरण पर उपशीर्षक है-‘अंदाज किस्सागोई का और जीवंतता कथेतर की’। जाहिर है यह एक कथाकार के कथेतर गद्य में ढले स्वाभाविक संस्मरण हैं इनमें आद्यन्त कथा-रस मौजूद है।

जैसा कि अक्सर होता है स्वयं प्रकाश ने शुरू में पहली किताब कविता-संग्रह- ‘मेरी प्यास तुम्हारे बादल’ ना....

Subscribe Now

पूछताछ करें