शैलेय

संवेदना, संबल तथा संकल्प

अपने एक वक्तव्य में स्वयं प्रकाश कहते हैं- ‘एक उभरती हुई, समझदार होती हुई, लड़खड़ाती-गिरती सम्हलती हुई, मुखरित होती हुई जनशक्ति, जनचेतना भी है....। जिसका होना हमारे वजूद के लिए ऑक्सीजन की तरह है। लेकिन वह सनसनीखेज और रोमांचक नहीं... धुन्नी और चौकन्नी है...। इस शाइस्तगी में रचना घुसती है और संवेदनशील मनुष्यों के लिए संबल और संकल्प खोज कर लाती है।’

यह कहना समीचीन ....

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